सोमनाथ मंदिर 2022 |  Somnath Temple 2022 in Hindi | Somnath Mandir 2022
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सोमनाथ मंदिर 2022 | Somnath Temple 2022 in Hindi | Somnath Mandir 2022

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सोमनाथ मन्दिर - Somnath Temple In Hindi

भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में पूज्नीय सोमनाथ मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र के वेरावल बंदरगाह के पास में स्थित एक बेहद प्राचीन शिव मंदिर है। वर्तमान में यह मंदिर जिस स्थान पर स्थित है उस जगह को प्रभास पाटन के नाम से भी जाना जाता है। प्राचीन हिन्दू ग्रंथों के अनुसार सोमनाथ मंदिर का निर्माण स्वयं चंद्रदेव ने किया था इसके अलावा इस मंदिर का उल्लेख ऋग्वेद, स्कन्द पुराण, भागवत और प्रभास खंड में भी स्पष्ट रूप से किया गया है। 

हालांकि वर्तमान सोमनाथ मंदिर का निर्माण सरदार वल्लभ भाई पटेल ने करवाया था। और वर्ष 1955 में हमारे देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने इस मंदिर का उद्घाटन किया था। वर्ष 1955 से पहले मुगल आक्रांताओं के द्वारा इस मंदिर को अनेकों बार तोड़ा गया था इसके बावजूद हिन्दू राजाओं के द्वारा बार-बार इस मंदिर का पुनर्निर्माण भी करवाया गया। 

सोमनाथ मंदिर के इतिहास से जुड़े हुए घटनाक्रमों के बारे में बताने के लिये रात के 07:30 से लेकर रात के 08:30 बजे तक मंदिर परिसर में लाइट एंड साउंड शो चलाया जाता है। जिसमें मंदिर के इतिहास से लेकर मंदिर से जुड़ी हुई लोककथाओं के बारे के बड़े ही सुंदर तरीके से बताया जाता है। धार्मिक आस्था का सबसे बड़ा केंद्र होने के साथ-साथ सोमनाथ मंदिर में बहुत सारे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्य भी किये जाते है। 

स्थानीय निवासियों के लिये यह मंदिर विशेष रूप से श्राद्ध और नारायण बलि जैसे धार्मिक कर्मों के लिये बेहद प्रसिद्ध है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार चैत्र, भाद्रपद और कार्तिक माह में यहाँ पर धार्मिक कार्य और श्राद्ध कार्य करने का विशेष महत्व बताया गया है। 

सोमनाथ मंदिर हिन्दू धर्म की तीन पवित्र नदियों हिरण्य, सरस्वती और कपिला का संगम स्थल भी है इस वजह से  देश भर के बहुत सारे श्रद्धालु यहाँ होने वाले त्रिवेणी संगम में स्नान करने के लिये भी आते रहते है।

सोमनाथ मंदिर की पौराणिक कथा - Mythology of Somnath Temple In Hindi

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Lord Shiva Statue near Somnath Temple

01 – सोमनाथ मंदिर के निर्माण और नामकरण से जुडी हुई एक बड़ी रोचक पौराणिक कथा आपको यहाँ सुनने को मिलती है। यहाँ पर  सबसे ज्यादा सुनी जाने वाली एक पौराणिक कथा के अनुसार चन्द्रमा ने दक्षप्रजापति की 27 पुत्रियों से विवाह किया था। लेकिन दक्षप्रजापति की उन सभी पुत्रियों में से रोहिणी को चन्द्रमा सबसे ज्यादा स्नेह और सम्मान दिया करते थे। 

इस वजह से चन्द्रमा की बाकि सभी पत्नियां उनसे नाराज हो गई और उन सभी ने मिल कर इस बात की शिकायत अपने पिता दक्षप्रजापति से भी की। इस पर दक्षप्रजापति ने चन्द्रमा को समझाने का प्रयास किया की वह उनकी सभी पुत्रियों से समान रूप से प्रेम करें। लेकिन चन्द्रमा ने दक्षप्रजापति की किसी भी बात पर ध्यान नहीं दिया। इससे नाराज हो कर दक्षप्रजापति ने चन्द्रमा को श्राप दे दिया की अब प्रति दिन तुम्हारी चमक क्षीण होती जायेगी। 

श्राप मिलने के बाद धीरे-धीरे चन्द्रमा की रौशनी हर दिन के साथ कम होने लग जाती है और इसके साथ पृथ्वी पर भी अँधेरा बढ़ने लगा जाता है। इस पर सभी देवता मिल कर दक्षप्रजापति से चन्द्रमा को श्राप से मुक्त करने की प्रार्थना करते है। इस पर दक्षप्रजापति देवताओं को कहते है की मेरे श्राप से मुक्त होने के लिए चन्द्रमा को भगवान शिव से प्रार्थना करनी चाहिए।  दक्षप्रजापति के दिए गए सुझाव के अनुसार चन्द्रमा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या करनी शुरू कर देते है । 

काफी समय तक तपस्या करने के बाद भगवान शिव चन्द्रमा को श्राप से मुक्त होने निवारण बताते है। अब आपका यह जानना जरुरी है की चन्द्रमा को पुराणों मेंसोमभी कहा गया है। भगवान शिव की सहायता से श्राप मुक्त होने के बाद चन्द्रमा इस स्थान पर भगवान शिव के शिवलिंग की स्थापना करते है। अब जब चन्द्रमा को वैदिक काल में सोम कह कर बुलाया जाता था इस वजह से इस स्थान को “सोमनाथ” के रूप में पूजा जाने लगा। 

ऐसा माना जाता है की भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद चन्द्रमा ने अपनी खोई हुई चमक प्राप्त करने के लिए यहाँ बहने वाली सरस्वती नदी में स्नान भी किया था। 

02 – भगवान श्री कृष्ण से जुडी हुई एक और पौराणिक कथा भी यहाँ पर प्रमुखता से सुनी जाती है। ऐसा माना जाता है की जब भगवान श्री कृष्ण भालुका तीर्थ पर आराम कर रहे थे तब कुछ समय के बाद यहाँ पर एक शिकारी आता है और गलती से भगवान श्री कृष्ण के पैर के तलुए में बने पद्मचिह्न को किसी हिरण की आँख समझ कर तीर चला देता है। 

जो की सीधा जाकर भगवान श्री कृष्ण के तलुए में लगता है और ऐसा माना जाता है की इसी वजह से भगवान श्री कृष्ण अपने भौगोलिक शरीर को त्याग कर वैंकुंठ धाम चले जाते है। आज भी सोमनाथ मंदिर के पास में भगवान श्री कृष्ण का एक बड़ा ही सुन्दर मंदिर बना हुआ है। 

03 – मुगलों ने अनेकों बार सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किये और अनेकों बार इस मंदिर को तोड़ दिया । लेकिन जितनी भी बार मुगलों ने इस मंदिर पर हमला किया था उतनी ही बार हजारों की संख्या में इस धरा के वीर सपूतों ने इस पवित्र मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। ऐसे ही एक वीर योद्धा हमीर सिंह गोहिल का नाम यहाँ बड़े सम्मान के साथ लिए जाता है। 

एक बार जब जफ़र खान ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था तब इसकी सूचना हमीर सिंह गोहिल को मिलती है। लेकिन एक क्षत्रिय होने के कारण उनको सोमनाथ मंदिर पर हुआ आक्रमण स्वीकार नहीं था। इसी वजह वह अपने 200 साथियों के साथ सीधे सोमनाथ मंदिर की रक्षा हेतु निकल पड़ते है। रास्ते मे उनको भील सरदार वेगड़ा जी मिलते है। 

और जब भील सरदार वेगड़ा जी को यह पता चलता है कि हमीर सिंह गोहिल सोमनाथ मंदिर की रक्षा करने के लिए अपने 200 साथियों के साथ जफ़र खान से युद्ध करने के लिये जा रहे हैं। तो वह भी अपने 300 भील योद्धाओं के साथ हमीर सिंह के साथ सोमनाथ मंदिर की रक्षा हेतु रवाना हो जाते है। सोमनाथ मंदिर पहुँच कर हमीर सिंह गोहिल और भील सरदार वेगड़ा ने कुल 09 दिनों तक जफ़र खान की सेना को सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण करने से रोके रखा । 

लेकिन अंत मे युद्ध के 11वें दिन हमीर सिंह गोहिल और भील सरदार वेगड़ा जी जी रणभूमि में वीरगति को प्राप्त हुए। कहा जाता है कि हमीर सिंह गोहिल का युद्ध करते समय सिर धड़ से अलग हो जाता है तो उनको शरीर बीना धड़ के कई देर तक युद्ध करता रहा। आज भी हमीर सिंह गोहिल और भील सरदार वेगड़ा जी की प्रतिमाएं सोमनाथ मंदिर के पास में स्थापित की गई है।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास - Somnath Temple History In Hindi

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Ruins of Somnath Temple | Click on image For Credits

भगवान शिव को समर्पित सोमनाथ मंदिर भारत इकलौता ऐसा मंदिर है जिस पर सबसे ज्यादा मुग़ल और विदेशी आक्रमण हुये। कई इतिहासकारों का यह मानना है की सोमनाथ मंदिर पर 17 बार आक्रमण करके नष्ट किया गया  और 07 बार इस मंदिर का पुनर्निमाण करवाया गया। अंतिम बार इस मंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 1947 में शुरू किया गया था जो वर्ष 1951 में पूरा हुआ। 

सोमनाथ मंदिर का सबसे पहले निर्माण कब हुआ इसके अभी तक कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले है। लेकिन हिन्दू धर्म से जुड़े हुए कई प्राचीन ग्रंथो जैसे ऋग्वेद, स्कन्द पुराण, भागवत और प्रभास खंड आदि में इस मंदिर और यहाँ स्थापित शिवलिंग के बारे में स्पष्ट रूप से लिखा गया है। इन प्राचीन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मूल सोमनाथ मंदिर का निर्माण सतयुग के समय स्वयं चंद्रमा (सोमदेव) ने सोने से इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इसके अलावा त्रेता युग में रावण ने भी चांदी से इस मंदिर का निर्माण कार्य करवाया था। 

आगे चलकर द्वापरयुग में भगवान श्री कृष्ण ने चंदन की लकड़ी से सोमनाथ मंदिर का निर्माण करवाया था। कई इतिहासकारों के अनुसार सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण या जीर्णोद्धार का कार्य वल्लभी के मैत्री राजाओं ने 650 ईसवी के आसपास करवाया था। इसके लगभग 75 साल बाद 725 ईसवी में सिंध के अरब शासक अल जुनैद ने सोमनाथ मंदिर पर पहली बार आक्रमण किया और इसे लूटा और मंदिर की सारी संपत्ति लेकर चला गया। हालाँकि इस आक्रमण के अभी तक कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले है। 

इस आक्रमण के लगभग 90 साल के बाद वर्ष 815 ईसवी में गुर्जर प्रतिहार शासक नागभट्ट द्वितीय द्वारा इस मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य करवाया गया। ऐतिहासिक प्रमाणों और कई इतिहासकारों के अनुसार  सोमनाथ मंदिर पर मुगल आक्रमणकारियों ने कई बार आक्रमण करके इस लुटा और ध्वस्त किया। इन सभी आक्रमणकारियों में अल जुनैद, महमूद गजनी (1024), अफजल खान, अल्लाउद्दीन खिलजी (1296), मुजफ्फर शाह (1375), महमूद बेगड़ा (1451) और औरंगजेब (1665) के नाम प्रमुखता से लिये जाते है। 

इतने सारे आक्रमणों के बावजूद कई हिन्दू राजाओं ने सोमनाथ मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार कार्य करवाया। सबसे पहले उज्जैन के शासक विक्रमादित्य ने लगभग 2500 वर्ष पहले सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य करवाया था। 

उसके बाद वल्लभी के राजा (650 ईसवी), अन्हिलवाड़ा के भीमदेव (11 वीं शताब्दी), जूनागढ़ के राजा खंगारा ने (1351 ईसवी), महारानी अहिल्याबाई होल्कर (18 वीं शताब्दी) और सबसे अंत में भारत के स्वतंत्र होने के बाद देश के सबसे पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 13 नवंबर 1947 में सोमनाथ  मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य शुरू करवाया जो की 01 दिसंबर 1955 को पूरा हुआ। 

इसके बाद देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद शर्मा 01 दिसंबर 1955 को सोमनाथ मंदिर को हमारे देश के आम नागरिकों को समर्पित कर देते है।  

सोमनाथ मंदिर की वास्तुकला - Architecture of Somnath Temple in Hindi

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Somnath Mandir Gujrat | Click on image For Credits

हालाँकि वर्तमान सोमनाथ मंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 1955 में पूरा हुआ था लेकिन इसके बावजूद भी इस मंदिर के निर्माण के समय इस कि प्राचीन वास्तुशैली का पूरी तरह से ध्यान रखा गया है। इसी वजह से वर्तमान सोमनाथ मंदिर चालुक्य शैली में निर्मित हिन्दू वास्तुकला का एक बहुत ही सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। 

मंदिर के चारों तरफ आपको बेहद महीन और जटिल नक्काशी देखने का मिलती है। मुख्य मंदिर की दीवारों पर हजारों की संख्या में हिन्दू देवी देवताओं की बहुत ही महीन नक्काशी वाली सुंदर मूर्तियाँ देखने को मिलती है। सोमनाथ मंदिर को तीन भागों में बांटा गया है जिन्हें – गृभगृह, नृत्यमंडप और सभा मंडप के नाम से जाना जाता है। 

आप जब मंदिर में प्रवेश करते है तो सबसे पहले नृत्यमंडप आता है उसके बाद सभा मंडप आता है। मंदिर के सबसे पिछले भाग में गृभगृह है जिसमें भगवान शिव का प्राचीन शिवलिंग स्थित है। सोमनाथ मंदिर लगभग 10 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और इस पूरी परिधि में 42 प्राचीन और नए मंदिर बने हुए है। 

सोमनाथ मंदिर परिसर में माता पार्वती, माँ गंगा, माता लक्ष्मी, माता सरस्वती और नंदी के विग्रह भी स्थापित किये हुए है। इसके अलावा आपको मंदिर परिसर में गणेश का बेहद सुंदर मंदिर भी देखने को मिलता है। मंदिर के पास में ही गौरीकुंड नाम की एक पवित्र झील भी बनी हुई है जिसके पास में भी  शिवलिंग स्थापित किया हुआ है।

 मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के पास एक फोटो गैलरी बनी हुई है जिसमें मंदिर के खंडहर, उत्खनन, पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार से जुड़ीं हुई तश्वीरें प्रदर्शित की गई है। सोमनाथ मंदिर के पास में वर्ष 1782 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने एक शिव मंदिर का निर्माण करवाया था जिसके लिए कहा जाता है कि सोमनाथ मंदिर का मूल शिवलिंग आज भी इस मंदिर में स्थापित किया हुआ है।

बाण स्तंभ सोमनाथ मंदिर- Baan Stambh Somnath Temple in Hindi

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Somnath Temple Gujrat | Click on image For Credits

सोमनाथ मंदिर के दक्षिण दिशा में स्थित बाण स्तंभ मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिये हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहा है। हालाँकि बाण स्तंभ का निर्माण कब हुआ इसके बारे अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी प्राप्त नहीं हो पाई है लेकिन इतिहास की पुस्तकों मसछठी शताब्दी के आसपास इसका उल्लेख देखने को मिलता है। 

वास्तव में सोमनाथ मंदिर में स्थित बाण स्तंभ एक दिशादर्शक स्तंभ है जिसके ऊपर सिरे पर एक बाण बना हुआ है जिसका मुहँ समुद्र की तरफ है। बाण स्तंभ पर एक शिलालेख भी लिखा हुआ है जिस पर संस्कृत में ( ‘आसमुद्रांत दक्षिण ध्रुव, पर्यंत अबाधित ज्योर्तिमार्ग‘ ) अंकित किया गया है। 

सामान्य भाषा में इसका मतलब होता है कि समुद्र के इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव तक सीधी रेखा में एक भी अवरोध या बाधा नहीं है। बाण स्तंभ पर संस्कृत में लिखे हुए इन शब्दों के अनुसार समुद्र के इस छोर से लेकर अगर आप दक्षिणी ध्रुव तक समुद्र मार्ग से जाते है तो आपको किसी भी प्रकार की कोई भू-भाग नहीं मिलेगा।

सोमनाथ मंदिर में प्रवेश का समय - Somnath Temple Entry Timing in Hindi

सोमनाथ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए सुबह 06:00 से लेकर रात को 10:00 बजे तक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहता है। 

नोट :- मंदिर में प्रवेश के समय में बदलाव संभव है इसलिए जब भी मंदिर में दर्शन करने के लिए जाएँ तब एक बार मंदिर में प्रवेश के समय के बारे में जरूर पता कर लेवें।  

सोमनाथ मंदिर में आरती का समय - Somnath Temple Aarti Timing in Hindi

सोमनाथ मंदिर में दिन में तीन बार आरती की जाती है – मंदिर में सुबह की आरती 07:00 बजे, दोपहर की आरती 12:00 बजे और संध्या आरती शाम को 07:00 बजे की जाती है। 

सोमनाथ मंदिर के प्रमुख फेस्टिवल – Somnath Temple Festival In Hindi

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Somnath Jyotirling | Click on image for Credits

भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में पूज्नीय सोमनाथ मंदिर में वैसे तो हिन्दू धर्म से जुड़े हुए सभी त्योंहार बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाए जाते है। लेकिन कुछ त्योंहार ऐसे भी है जिन्हें यहाँ पर कुछ ज्यादा ही प्राथमिकता दी जाती है। और इन त्योंहारों में सबसे पहला त्योंहार है महा शिवरात्रि का त्योंहार। 

प्रतिवर्ष मार्च महीने में आने महा शिवरात्रि के समय सोमनाथ मंदिर में देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर जल अर्पित करने के लिए आते है। विशेषकर स्थानीय महिलाएं महा शिवरात्रि के समय सोमनाथ मंदिर में दर्शन करने के लिये जरूर जाती है। इस समय सभी विवाहित और और अविवाहित महिलाएं अपने परिवार की भलाई के लिये मंदिर में विशेष प्रकार की पूजा करती है। 

महा शिवरात्रि के समय सोमनाथ मंदिर में मुख्य रूप ठंडाई, भांग, बादाम और दूध से बने हुए प्रसाद का वितरण भी किया जाता है। भगवान शिव को समर्पित सावन माह में भी आपको यहाँ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने की मिलती है। सावन माह में देश विदेश से भी श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने के लिए सोमनाथ मंदिर आया करते है। 

इसके अलावा हिन्दू धर्म का सबसे प्रमुख त्योंहार दिवाली भी सोमनाथ मंदिर में बड़ी प्रमुखता से मनाया जाता है। पौराणिक धर्म ग्रंथो के अनुसार भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन त्रिपुसर नाम के राक्षस का वध किया था  इसी वजह से दिवाली के बाद कार्तिक पूर्णिमा का त्योंहार भी बड़ी धूमधाम से सोमनाथ मंदिर में मनाया जाता है।

सोमनाथ मंदिर के पास घूमने की जगह – Places To Visit Near Somnath Temple In Hindi

सोमनाथ बीच, पंच पांडव गुफा , लक्ष्मीनारायण मंदिर, चोरवाड़ बीच, सूरज मंदिर, अहिल्या बाई का मंदिर ।

सोमनाथ में कहाँ रुके - Hotels in Somnath in Hindi

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Hotels in Somnath | Ref img

एक प्रसिद्ध धार्मिक तीर्थ स्थल होने के की वजह से सोमनाथ  में श्रद्धालुओं के रुकने के लिए धर्मशाला और होटल्स दोनों ही तरह की सुविधाएँ उपलब्ध है। इसके अलावा बहुत सारी ऑनलाइन होटल बुकिंग वेबसाइट भी सोमनाथ  में होटल बुक करने की सुविधा उपलब्ध करवाती है। सोमनाथ में बनी हुई बहुत सारी धर्मशालों के फ़ोन नंबर आपको गूगल पर उपलब्ध मिल जाएंगे, आप वहाँ पर कॉल करके अपने लिए धर्मशाला में रूम बुक करवा सकते है।  

सोमनाथ कैसे पहुँचे - How to reach Somnath in Hindi

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How to reach Somnath | Red Img

हवाई मार्ग से सोमनाथ कैसे पहुँचे - How to reach Somnath by Air in Hindi

दीव हवाई अड्डा सोमनाथ के सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। हालाँकि दीव हवाई अड्डा एक विशिष्ट वाणिज्यिक हवाई अड्डा नहीं है,यहाँ पर  सप्ताह में सिर्फ एक दो फ्लाइट ही जाती है वो भी गिने चुने शहरों से। इसके अलावा राजकोट हवाई अड्डा भी सोमनाथ मंदिर के सभी नजदीकी हवाई अड्डा है। राजकोट हवाई अड्डे से सोमनाथ की दुरी मात्र 200 किलोमीटर ही है। 

इसके अलावा अहमदाबाद का  सरदार वल्लभ भाई पटेल हवाई  भी सोमनाथ मंदिर के सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। आप दीव, राजकोट और अहमदाबाद इन सभी जगहों से सोमनाथ बस, टैक्सी और कैब द्वारा बड़ी आसानी से पहुँच सकते है। 

रेल मार्ग से सोमनाथ कैसे पहुँचे - How to reach Somnath by Train in Hindi

सोमनाथ के सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल रेलवे स्टेशन है। वेरावल रेलवे स्टेशन से सोमनाथ की दुरी मात्र 05 किलोमीटर के आसपास ही है।  वेरावल रेलवे स्टेशन देश के कई प्रमुख रेलवे स्टेशन से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। वेरावल रेलवे स्टेशन से आप सोमनाथ मंदिर टैक्सी और कैब के सहायता से बड़ी आसानी से पहुँच सकते है। 

सड़क मार्ग से सोमनाथ कैसे पहुँचे - How to reach Somnath by Road in Hindi

सोमनाथ मंदिर सड़क मार्ग के द्वारा बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। गुजरात के प्रमुख शहर जैसे अहमदाबाद, पोरबंदर और  राजकोट जैसे शहरों  नियमित रूप से बस सेवा उपलब्ध रहती है। इसके अलावा आप टैक्सी और कैब की सहायता से भी सोमनाथ मंदिर बड़ी आसानी से पहुँच सकते है। इसके अलावा आप अपने निजी वाहन से भी सोमनाथ बड़ी आसानी से पहुँच सकते है। 

(अगर आप मेरे इस आर्टिकल में यहाँ तक पहुंच गए है तो आप से एक छोटा से निवदेन है की नीचे कमेंट बॉक्स में इस लेख से संबंधित आपके सुझाव जरूर साझा करें, और अगर आप को कोई कमी दिखे या कोई गलत जानकारी लगे तो भी जरूर बताए।  में यात्रा से संबंधित जानकारी मेरी इस वेबसाइट पर पोस्ट करता रहता हूँ, अगर मेरे द्वारा दी गई जानकारी आप को पसंद आ रही है तो आप अपने ईमेल से मेरी वेबसाइट को सब्सक्राइब जरूर करे, धन्यवाद )

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